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अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारमनसानां तु वसुधैव कुटुंबकम्

Saturday, February 13, 2010

विल यु बी माय वेलेंटाइन

पश्चिम से आयातित यह पर्व शुरुआत में वहां उम्र दराज  लोग मनाते थे. बाजारवाद ने सब कुछ पलट कर रख दिया है. भारत में कदम रखने के साथ ही सैंट वेलेंटाइन डे, १४ फरवरी प्रेम दिवस बनकर छा गया. 

वेलेंटाइन एक  रोमन परिवार का नाम Valentinus, जो लैटिन शब्द(पुल्लिंग शब्द) valens, जिसका अर्थ है 'मजबूत और स्वस्थ' नाम से व्युत्पन्न है. " वेलेंटाइन रोमन कैथोलिक चर्च के कई संतों के नाम थे. सेंट वेलेंटाइन दिवस तीसरी सदी में एक शहीद के लिए नामित किया गया था. फ्रांस में यह लड़कियों के लिए भी प्रयोग में है. नाम का सामान्य स्त्री रूप Valentina है. जैसे "Will you be my Valentine" (क्या तुम मेरी महबूबा बनोगी?)  






पहली बार वर्ष 1999 में पटना प्रवास के दौरान मैंने VALENTINE DAY सुना था और उस समय वातावरण में इसके प्रभाव से परिचित कुछ लोगों को देखा था.
ख़ैर दो तस्वीरे हैं मेरा मतलब कवितायें हैं....

कभी लिखा था एक अंग्रेजी कविता जिसका हिन्दी अनुवाद भी जैसे तैसे साथ में दे रहा हूँ. देखिये कैसी रही.

Heartbeat high this moment.
And tongue keeps silent
Puzzles couldn't solved
Problems more involved
You feel when alone
 Voices heard unknown
   A soul comes your near
   Love starts with fear
   Environment looks nice
   New dreams float in eyes
   Thrill begins with new taste
   Its realize you to think best
   Nothing under your control
   Emotions failed to withdrawal
       Days and nights spent in past
       And today it is blast
       Yes, I am in Love...

अनुवाद: 

दिल की धड़कन उच्च इस क्षण
और जुबाँ रहता है बंद
पहेलियां बुझा नहीं सका
समस्याओं से परिचय हुआ
जब आप अकेले होते हैं
   
अज्ञात आवाजें सुनते हैं
  
कोई ख़ास आपके पास आता है
   
प्यार भय के साथ शुरू होता है
  
नज़ारे अच्छे लगने लगते है
   
नए सपने आंखों में तैरने लगते हैं
   
रोमांच नए स्वाद के साथ आता है
   
इसका एहसास बहुत ही भाता है
  
कुछ भी आपके नियंत्रण में नहीं होता
   
भावनाए पिछे हटने से इन्कार करती है
ढेरो दिन और रात चिंतन में बीते
और आज यह विस्फोट होता है
       
हाँ, मैं प्यार में हूँ ...
***


ख़ैर आज जो मैं बताना चाह रहा था, आधुनिकता से लबरेज बाजारवाद की, जहाँ बच्चे किशोर युवा सभी गिरफ्त में हैं... आफ्टर इफेक्ट्स आफ वेलेंटाइन  

EFFECTS OF IMPORTED VALENTINE DAY.


कच्ची उम्र के जोड़े घुमते लेकर हाथ अपने हाथ में  
चाँद सितारों कि सैर करते अक्सर ख्वाबो में रात में  

स्कूल-कालिजों में लगते दीवानी-दीवानों के मेले  
सुबह-शाम इश्क मोहब्बत खाली पीली बात में  

मैसेज मिसकॉल को कोडवर्ड बना गुफ्तगू करते हैं  
क्लासेज सारी पूरी करते मोबाइल लेकर हाथ में  

कॉफ़ी हाउस गिफ्ट हाउस सब इनसे गुलज़ार है  
मीटिंग तय पार्क में कभी लाइब्रेरी अहात में  

इल्मो तालिम कि हसरत ले नौजवाँ शहर को आये  
आशिक बन कर घूम रहे हैं गली गली दिन रात में 

***
 

- सुलभ


Friday, February 5, 2010

उठो सुबह हो चुकी चमक रहा आफताब देखो


इससे पहले कि गीली आँखों में तेज़ाब देखो 
होश में आओ रहनुमाओं वर्ना इंकलाब देखो


हक़ मार जाते हो
तुम अपने ही खिदमतगार के
रगों में इसके खून नहीं  सुलगता अलाव देखो


जंगल पहाड़ उजाड़ कर ये कैसी तरक्की
पाई है
चार दिन कि जिंदगी में कुदरत के सौ अज़ाब देखो


जमीन मकान आसमान सब यहाँ बेमानी है
हवा पानी को तरस रहे शहर बेहिसाब देखो


महफ़िल कैसे सजे यहाँ तेल खरीदने की कूबत नहीं
महंगाई के आगे हार गए कितने रईस नवाब देखो


सच को झूट बनाने का खेल और नहीं खेल सकते 
प्यार भरे तिरे सवाल के आगे हम हुए लाजवाब देखो 


खोल दो बंद दरवाजे खिड़कियाँ औ' रोशनदानों को
उठो सुबह हो चुकी चमक रहा आफताब देखो ||
***



Monday, January 25, 2010

गणतंत्र दिवस 2010 पर विशेष - दिल्ली को समर्पित

मैं दिल्ली हूँ ख्वाब सभी के सजाता हूँ
हाँ ये सच है पहले खूब  आजमाता हूँ
तुम भी समझो जिम्मेदारियां अपनी
बोझ करोड़ो का
मैं रोज़ उठाता हूँ 
 
जनहित में जारी सन्देश..."मेरी दिल्ली - मैं ही संवारूं "
 








मैं दिल्ली हूँ
जान-ए-हिंद हिन्दुस्तान का दिल हूँ...

अपने सीने में दफ़न
सदियों की दास्ताँ लिये
काँटों की सेज पे
ख्वाब-ए-गुलिस्ताँ लिये
नई नई मुश्किलों से लड़ता
मुसलसल आगे बढ़ता
करोड़ों हिन्दुस्तानियों का
मुस्तकबिल हूँ
मैं दिल्ली हूँ

मेहरौली से रोहिणी तक
पंजाबी बाग से ओखला तक 
निजामुद्धीन से नज़फगढ़
आनंदविहार से द्वारका तक
हर सुबह हर शाम
हर पहर गतिशील हूँ
मैं दिल्ली हूँ
जान-ए-हिंद हिन्दुस्तान का दिल हूँ...





लालकिले के घास में
हस्तिनापुर के इतिहास में
सल्तनत के प्रवास में
पुराना किले के बनवास में
जोरो जुल्म और इन्साफ के
हर पन्ने में शामिल हूँ
मैं दिल्ली हूँ


शाहजहाँ के महलों में
ग़ालिब के ग़ज़लों में
मीना बाज़ार की भीड़ में
शांत यमुना के नीड़ में
हर कोना रौनक 
संगीत की महफ़िल हूँ
मैं दिल्ली हूँ
जान-ए-हिंद हिन्दुस्तान का दिल हूँ...


हिंदी उर्दू की तमीज लिये 
मेले त्यौहार तीज़ लिये 
गीतों में  रुबाइयों में 
चांदनीचौक की मिठाइयों में 
बच्चे-बुजुर्ग सभी के 
ख्वाहिशों की मंजिल हूँ
मैं दिल्ली हूँ




अंतर्राष्ट्रीय  उत्थानों  में 
विकासवाद के सिद्धांतों में 
नये नवेले  उद्योंगों में 
तकनीक के प्रयोगों में 
दिन प्रतिदिन
निरंतर विकासशील हूँ
मैं दिल्ली हूँ


नॉएडा गुडगाओं गाजियाबाद
अपने दामन में समेटे फरीदाबाद
श्रमजीवियों की प्रगति जहाँ  
प्रतिभाओं की उन्नति जहाँ 
हर किसी की नाव खेता 
स्वर्णिम सपनों की झील हूँ 
मैं दिल्ली हूँ
जान-ए-हिंद हिन्दुस्तान का दिल हूँ

***

जय हिंद 





-  सुलभ जायसवाल   

Friday, January 15, 2010

इजहारे जज़्बात की ज़हमत कीजिये






इजहारे जज़्बात की ज़हमत कीजिये
मोहब्बत की है तो हिम्मत कीजिये

खुदा के रहमत से कायम मोहब्बत
सजदे में सर रख
इबादत कीजिये

मोहब्बत की मंजिल है इम्तहान लेगी
ना उफ़  ना कोई  शिकायत कीजिये


माना
की मोहब्बत में खामोश है जुबाँ
चाहें तो निगाहों से शरारत कीजिये

रंजिश  साज़िश  हिमाकत  नफ़रत
मोहब्बत के दुश्मन हैं
खिलाफत कीजिये 


मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत
हर शख्स को मिले ऐसी चाहत कीजिये




दूर दिलों तक पहुंचे 'सुलभ' तेरे अलफ़ाज़
मोहब्बत में यारो खतो-किताबत कीजिये



- सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "