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Friday, January 15, 2010

इजहारे जज़्बात की ज़हमत कीजिये






इजहारे जज़्बात की ज़हमत कीजिये
मोहब्बत की है तो हिम्मत कीजिये

खुदा के रहमत से कायम मोहब्बत
सजदे में सर रख
इबादत कीजिये

मोहब्बत की मंजिल है इम्तहान लेगी
ना उफ़  ना कोई  शिकायत कीजिये


माना
की मोहब्बत में खामोश है जुबाँ
चाहें तो निगाहों से शरारत कीजिये

रंजिश  साज़िश  हिमाकत  नफ़रत
मोहब्बत के दुश्मन हैं
खिलाफत कीजिये 


मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत
हर शख्स को मिले ऐसी चाहत कीजिये




दूर दिलों तक पहुंचे 'सुलभ' तेरे अलफ़ाज़
मोहब्बत में यारो खतो-किताबत कीजिये



- सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'

21 comments:

Mithilesh dubey said...

रंजिश साज़िश हिमाकत नफ़रत
मोहब्बत के दुश्मन हैं खिलाफत कीजिये

भाई आपकी ये लाईंन दिल को छु गयी , बढिया प्रस्तुति ।

sanjeev kuralia said...

बहुत सुंदर रचना .....आभार !

राकेश खंडेलवाल said...

दूर दिलों तक पहुंचे 'सुलभ' तेरे अलफ़ाज़
मोहब्बत में यारो खतो-किताबत कीजिये

अच्छा ख्याल है

Mansoor Ali said...

मोहब्बत का पैग़ाम अच्छा लगा है,
कहा दिल ने इसकी तिलावत कीजिए.

मनोज कुमार said...

ग़ज़ल क़ाबिले-तारीफ़ है।

राज भाटिय़ा said...

रंजिश साज़िश हिमाकत नफ़रत
मोहब्बत के दुश्मन हैं खिलाफत कीजिये
बहुत उम्दा जी, बहुत लाजवाब
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

माना की मोहब्बत में खामोश है जुबाँ
चाहें तो निगाहों से शरारत कीजिये

-वाह!! उम्दा ख्याल!! बेहतरीन!

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी ग़ज़ल.

RAJ SINH said...

मोहब्बत के लिए कुछ खास दिल माकूल होते हैं
ये वो नगमा है जो हर साज़ पे गया नहीं जाता

फिर भी आप पैगाम तो बाँटते चलिए .........

सुन्दर !

रश्मि प्रभा... said...

waah

दिगम्बर नासवा said...

मोहब्बत की मंजिल है इम्तहान लेगी
ना उफ़ ना कोई शिकायत कीजिये ...

वाह .. क्या बात कही है सुलभ जी ......... मुहब्बत इम्तिहान लेती है ........ फिर जब ये आग का दरिया है तो शिकायत कैसी .... शिकवा कैसा ......... बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है ...... मार डाला आपने .........

विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत सुंदर बात कही आपने..प्यार करने वालों के नाम एक खूबसूरत संदेश...बढ़िया ग़ज़ल..बधाई सतरंगी जी!!!

Devendra said...

वाह क्या बात है!
हर शेर अच्छे हर बात अच्छी.
तेरी गजल लगती है सच्ची.

Babli said...

बहुत सुन्दर रचना लिखा है आपने! इस लाजवाब और बेहतरीन रचना के लिए बधाई!

रचना दीक्षित said...

मोहब्बत की मंजिल है इम्तहान लेगी
ना उफ़ ना कोई शिकायत कीजिये

बहुत ही गजब की ग़ज़ल लिखी है
मुहब्बत में क्या करें क्या ना करें नसीहत अच्छी है पर कौन मानता है.ये कागज़ पे लिखी बातें नहीं ये तो दिल किताब पढ़ कर बोलता है.

kshama said...

माना की मोहब्बत में खामोश है जुबाँ
चाहें तो निगाहों से शरारत कीजिये

Aise to har pankti dohrayi ja sakti hai..! Wah!

Murari Pareek said...

आपकी मोहब्बत रास आ गयी ! बसंत पंचमी की अनेकानेक शुभ कामनाए!!!

प्रकाश पाखी said...

बेहतरीन!नायाब!! अद्वितीय!!!....
आपकी इस गजल की खूबसूरती पर दिलो जान से फ़िदा हो गए!

रंजिश साज़िश हिमाकत नफ़रत
मोहब्बत के दुश्मन हैं खिलाफत कीजिये


मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत
हर शख्स को मिले ऐसी चाहत कीजिये


क्या उस्तादाना प्रयोग है...सारे शेर जान लेवा है...
मोहब्बत को केंद्र में बनाए रखा है...और फिर निगाहों से शरारत वाला शेर माशाल्लाह !मतले से ही बाँध दिया ..
सुलभ जी वाकई इंद्रजाल सी रचना है....
बधाई!

शुभम जैन said...

खुदा के रहमत से कायम मोहब्बत
सजदे में सर रख इबादत कीजिये

माना की मोहब्बत में खामोश है जुबाँ
चाहें तो निगाहों से शरारत कीजिये

bahut sundar gazal...
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akarshjoshi said...

it was really nice sulabh .......

ज्योति सिंह said...

इजहारे जज़्बात की ज़हमत कीजिये
मोहब्बत की है तो हिम्मत कीजिये

खुदा के रहमत से कायम मोहब्बत
सजदे में सर रख इबादत कीजिये

मोहब्बत की मंजिल है इम्तहान लेगी
ना उफ़ ना कोई शिकायत कीजिये


माना की मोहब्बत में खामोश है जुबाँ
चाहें तो निगाहों से शरारत कीजिये

रंजिश साज़िश हिमाकत नफ़रत
मोहब्बत के दुश्मन हैं खिलाफत कीजिये


मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत
हर शख्स को मिले ऐसी चाहत कीजिये



दूर दिलों तक पहुंचे 'सुलभ' तेरे अलफ़ाज़
मोहब्बत में यारो खतो-किताबत कीजिये
kisi ek ke baare me soch hi nahi payi saari rachna behtrin

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "