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Thursday, April 1, 2010

खिलौने अकेले में रोते हैं






गुजरा वक़्त कब लौटा है
आंसू बह जाने के बाद


दीवानों के घर नहीं बसते
साकी औ' मयखाने के बाद

खिलौने अकेले में रोते हैं
बच्चों को हंसाने के बाद

पास कोई नज़र नहीं आता
आँखें बूढी हो जाने के बाद

यादों की उमर बढ़ती है
बचपन याद आने के बाद

"सुलभ" किसको क्या मिला
दिल किसी का दुखाने के बाद

(सतरंगी फिलोसफी से कुछ पंक्तियाँ )

21 comments:

पी.सी.गोदियाल said...

दीवानों के घर नहीं बसते
साकी औ' मयखाने के बाद

खिलौने अकेले में रोते हैं
बच्चों को हंसाने के बाद

ये चार लाइने बहुत पसंद आई सुलभ भाई !

डॉ टी एस दराल said...

यादों की उमर बढ़ती है
बचपन याद आने के बाद

सही कहा ।

लता 'हया' said...

कुछ न कह के भी बहुत कुछ कहा जा सकता है ,तो कुछ न कहने के लए आभार ,
khilone,,,,अच्छा ख्याल लगा और दर्द बाँट लेंगे ,,नेक ,,,,,,,,,,,,,,,,,,शुक्रिया

राज भाटिय़ा said...

"सुलभ" किसको क्या मिला
दिल किसी का दुखाने के बाद
बहुत सुंदर गजल
धन्यवाद

रचना दीक्षित said...

यादों की उमर बढ़ती है
बचपन याद आने के बाद


ओह बचपन !! न ही याद दिलाओ तो अच्छा है. जब भी याद करो कुछ खोने का, कुछ भूल आने का, कुछ पीछे छोड़ आने का अहसास होता है.हर पल कुछ कमी सी महसूस होती है.

रश्मि प्रभा... said...

यादों की उमर बढ़ती है
बचपन याद आने के बाद
waah

Apanatva said...

यादों की उमर बढ़ती है
बचपन याद आने के बाद

"सुलभ" किसको क्या मिला
दिल किसी का दुखाने के बाद

bahut sunder abhivykti......

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

Bahut sundar ghazal hai...
har sher ghajab ka hai...
par sabse achha laga...
पास कोई नज़र नहीं आता
आँखें बूढी हो जाने के बाद
kyunki isme ek sachhai hai...kadwi sachhai..

Prem Farrukhabadi said...

पास कोई नज़र नहीं आता
आँखें बूढी हो जाने के बाद

यादों की उमर बढ़ती है
बचपन याद आने के बाद

"सुलभ" किसको क्या मिला
दिल किसी का दुखाने के बाद

सुंदर गजल
धन्यवाद!!!

shama said...

खिलौने अकेले में रोते हैं
बच्चों को हंसाने के बाद

पास कोई नज़र नहीं आता
आँखें बूढी हो जाने के बाद

यादों की उमर बढ़ती है
बचपन याद आने के बाद

"सुलभ" किसको क्या मिला
दिल किसी का दुखाने के बाद

Aah! Kayi baar padhke bhee tasallee huee nahi...!Gazab kiya hai aapne!

दिगम्बर नासवा said...

खिलौने अकेले में रोते हैं
बच्चों को हंसाने के बाद

पास कोई नज़र नहीं आता
आँखें बूढी हो जाने के बाद

बहुत गहरी बातें लिखी हैं सुलभ जी आज .. वैसे डब शेर कुछ न कुछ अलग है .. पर ये दोनो बहुत ही नये लगे .. दिल में उतार गये ...

JHAROKHA said...

baht hibadhiya likha hai aapne. prashanshniy. दीवानों के घर नहीं बसte
साकी औ' मयखाने के बाद

खिलौने अकेले में रोते हैं
बच्चों को हंसाने के बाद

विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत कुछ बाद में ही होता है..जीवन में हर चीज़ टाइम पे हो बहुत मुश्किल है..बढ़िया रचना...सुलभ जी बहुत दिन के बाद आना संभव हो पाया पर बहुत अच्छा लगा....धन्यवाद चाहूँगा भाई..

Babli said...

खिलौने अकेले में रोते हैं
बच्चों को हंसाने के बाद
पास कोई नज़र नहीं आता
आँखें बूढी हो जाने के बाद
बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! बिल्कुल सही कहा है आपने! बहुत बढ़िया और शानदार रचना लिखा है आपने! बधाई!

M VERMA said...

यादों की उमर बढ़ती है
बचपन याद आने के बाद
बेहतरीन गज़ल सुन्दर भाव

anjana said...

बहुत बढ़िया रचना ... बधाई

अल्पना वर्मा said...

खिलौने अकेले में रोते हैं
बच्चों को हंसाने के बाद

पास कोई नज़र नहीं आता
आँखें बूढी हो जाने के बाद

वाह!बहुत ही उम्दा लिखा है .
दिल को छू गए ये सभी ख्याल .
बहुत ही अच्छी ग़ज़ल लिखी है.

sandhyagupta said...

Bhavpurn aur sundar abhivyakti.badhai.

Vijay Kumar Sappatti said...

waah waah .. bachpan ki yaade to taaza ho hi gayi .. aapka likha hua man ko choo gaya ..

vijay

陳哲毓只當臺灣人 said...
This comment has been removed by a blog administrator.
आशीष/ ASHISH said...

Kewal do shabd:
Manna padega!

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"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "