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अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारमनसानां तु वसुधैव कुटुंबकम्

Friday, November 20, 2009

ब्लॉग जगत में शान्ति के लिए यह विजेट लगाएं



हम मानवता के रक्षक हैं...

मैं उन साइट्स और ब्लॉग को पढने और उनपर टिप्पणी करने से बचुंगा
जहाँ सस्ती लोकप्रियता के लिए धर्म-जाति संगत/ धर्म-जाति विरोधी,
निरर्थक बहस,व्यक्तिगत आक्षेप, अभद्र अश्लील रोषपूर्ण भाषायुक्त विचार
या वक्तव्य प्रस्तुत किये जाते हैं.



कोई समस्या होने पर इस इमेज से काम चलायें।
Bloggers Unity Photo Download


सुरक्षा कवच: यह विजेट लगना जरुरी नही है। संदेश को आत्मसात कर लीजिये, सुरक्षा हो जाएगी।

17 comments:

राजीव तनेजा said...

बहुत ही बढिया....

अभी लगा रहा हूँ जी

कल्पना said...

वर्तमान में ब्लॉगजगत में कुछ शरारती और असामाजिक तत्वों द्वारा जो किया जा रहा है उसके मद्देनजर
तमाम ब्लोगर के लिए यही एक सार्थक कदम होगा.

संगीता पुरी said...

बिल्‍कुल सार्थक कदम !!

मनोज कुमार said...

आप बधाई के पात्र हैं।

कुन्नू सिंह said...

वाह बलागवाणी का ये काम मूझे बहुत बहुत ज्यादा अच्छा लगा।

ब्लागवाणी को और आपको बहुत बहुत धन्यवाद!

अभी ईसपर एक पोस्ट लिखता हूं।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर, लेकिन मेने तो बहुत पहले ही लगा रखा है

Udan Tashtari said...

बहुत बढिया-सार्थक कदम!

महावीर बी. सेमलानी said...

आपकी यह पहल हिन्दी ब्लॉग जगत को सुहानी लगे मेरी मगल कामनाए .

Ratan Singh Shekhawat said...

बहुत बढ़िया और सार्थक

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

शुभ विचार।

--------
क्या स्टारवार शुरू होने वाली है?
परी कथा जैसा रोमांचक इंटरनेट का सफर।

Suresh Chiplunkar said...

"...मैं उन साइट्स और ब्लॉग को पढने और उनपर टिप्पणी करने से बचुंगा जहाँ सस्ती लोकप्रियता के लिए धर्म-जाति संगत/ धर्म-जाति विरोधी, निरर्थक बहस,व्यक्तिगत आक्षेप, अभद्र अश्लील रोषपूर्ण भाषायुक्त विचार या वक्तव्य प्रस्तुत किये जाते हैं..."

1) निरर्थक बहस - यह कैसे तय होगा?
2) धर्म विरोधी - यदि कोई लगातार आपके धर्म को लेकर अनर्गल प्रचार करे, तब कब तक टिप्पणी नहीं करेंगे? कोई समय सीमा?
3) अभद्र, अश्लील - ये कौन तय करेगा कि क्या अभद्र है और क्या अश्लील?
4) रोषपूर्ण भाषा, विचार, वक्तव्य - इसका भी कोई मानक पैमाना नहीं है।

"तटस्थ" रहना कुछ समय के लिये तो ठीक है, लेकिन इतिहास ऐसे लोगों के अपराध भी गिनता है… कि उन्होंने "वक्त" पड़ने पर तटस्थ रहकर खुद का और समाज का कितना नुकसान किया है।

शिवम् मिश्रा said...

बहुत बढ़िया जी ..............हम ने भी लगा लिया है !
आभार आपका !

समर शेष है , नहीं पाप का दोषी केवल व्याघ्र said...

समर शेष है , नहीं पाप का दोषी केवल व्याघ्र
जो तटस्थ रहे , समय लिखेगा उनके भी अपराध

सुलभ सतरंगी said...

@तटस्थ व्याघ्र उर्फ़ सुरेश चिपलूनकर जी,

आपको पहले ही जवाब दिया जा चुका है. यहाँ आँख खोल कर पढ़िए.
मानवता के दुश्मन ब्लोगिंग से दूर रहें.
और गीता पर हाथ रखकर श्रद्धा से शपथ लीजिये की ब्लॉग समाज में गन्दगी(अभद्रता, अश्लीलता, निजी आक्षेप) नहीं फैलायेंगे.
जो भी गलत कीजिये बंद कमरे में (password protected page) में कीजिये. किसीको ऐतराज नहीं होगा.

विवाद को विराम देने के लिए आपका धन्यवाद!!

ज्ञान said...

बढ़िया

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

तब तो आप हमारे ब्लॉग आ सकते हैं!


बाकी तो सब माया है!!!!!!

चलिए यह टोटका भी करके देख लें लोग ? शायद?

शरद कोकास said...

इन विचारो पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिये लेकिन इन्हे एक एक कर दे तो बेहतर होगा ।

लिंक विदइन

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "