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अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारमनसानां तु वसुधैव कुटुंबकम्

Wednesday, December 16, 2009

चित्र कविता - 2 (एक ग़ज़ल)

पिछले दिनों नीरज जी की पोस्ट में यह चित्र देखा था. बहुत कुछ कह रहें है ये सजीव चित्र. इसे देखकर स्वतः ही लेखनी चल पड़ी
हँसते बोलते कहीं खो जाओ ये अच्छा तो नहीं है
अपने मन को बस दुखाओ ये अच्छा तो नहीं है

मैं जानता हूँ मेरी जाँ मैं तुमसे दूर हूँ बहुत
सोचकर यही तुम घबराओ ये अच्छा तो नहीं है

दिल तुम्हार नाजुक है यह मेरा दिल समझता है
याद करके धड़कन बढाओ ये अच्छा तो नहीं है

सफ़र से लौटूंगा जब भी पास तुम्हारे ही आऊंगा
इंतजार में आंसू बहाओ ये अच्छा तो नहीं है

21 comments:

अजय कुमार झा said...

वाह सुलभ जी क्या खूब चित्र को देखा आपने ..और क्या खूब लिखा आपने

महफूज़ अली said...

मैं जानता हूँ मेरी जाँ मैं तुमसे दूर हूँ बहुत
सोचकर यही तुम घबराओ ये अच्छा तो नहीं है....

बहुत ही सुंदर पंक्तियाँ...... संवादात्मक रुपी यह ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी.......

परमजीत बाली said...

अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं। बहुत सुन्दर रचना है।बधाई।

मैं जानता हूँ मेरी जाँ मैं तुमसे दूर हूँ बहुत
सोचकर यही तुम घबराओ ये अच्छा तो नहीं है...

seema gupta said...

सफ़र से जब भी लौटूंगा तुम्हारे पास ही तो आऊंगा

इंतजार में आंसू बहाओ ये अच्छा तो नहीं है ॥
" behd sundar panktiyan..."

regards

योगेन्द्र मौदगिल said...

bhav evm kathya behter hain.....

मनोज कुमार said...

हँसते बोलते कहीं खो जाओ ये अच्छा तो नहीं है
अपने मन को बस दुखाओ ये अच्छा तो नहीं है
ग़ज़ल दिल को छू गई।
बेहद पसंद आई।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत खूब चित्र को लफ़्ज़ों में उकेरा है शुक्रिया

M VERMA said...

वाकई यह चित्र स्वयम एक गजल है
और फिर आपकी गजल चित्रवत है
'सफ़र से लौटूंगा जब भी पास तुम्हारे ही आऊंगा
इंतजार में आंसू बहाओ ये अच्छा तो नहीं है ॥'
पर ये सफर लम्बा तो न हो

नीरज गोस्वामी said...

सफ़र से लौटूंगा जब भी पास तुम्हारे ही आऊंगा
इंतजार में आंसू बहाओ ये अच्छा तो नहीं है ॥

वाह सुलभ जी वाह...चित्र को जबान देदी आपने...सटीक शेर कहें हैं...और शुक्रिया आपका जो आपको मेरी रंगोली वाली पोस्ट के चित्र पसंद आये...चित्र दिखाना सार्थक कर दिया आपने...शुक्रिया.
नीरज

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

वाह वाह, बहुत सुन्दर!

अभिषेक ओझा said...

वाह ! आज की लाइने तो दिल को छू गयी.

dinesh said...

बहुत ही अच्छा लिखा है !

दिगम्बर नासवा said...

सफ़र से लौटूंगा जब भी पास तुम्हारे ही आऊंगा
इंतजार में आंसू बहाओ ये अच्छा तो नहीं है ...

बोलते हुवे चित्र पर लाजवाब ग़ज़ल की प्रस्तुति है सुलभ जी ......... और ये शेर तो कमाल है ..........

रश्मि प्रभा... said...

दिल तुम्हार नाजुक है यह मेरा दिल समझता है
याद करके धड़कन बढाओ ये अच्छा तो नहीं है
...........bahut khoob

Devendra said...

चित्र देख गज़ल लिख दो अच्छा है मगर
चित्र देख बहक जाओ अच्छा तो नहीं है.

पंकज said...

सुंदर चित्र, उससे भी सुंदर रचना.

http://epankajsharma.blogspot.com/

sujit kumar lucky said...

दिल तुम्हार नाजुक है यह मेरा दिल समझता है
उसकी बेकरारी को बस ये मन समझता है , बहुत खूब

Mrs. Asha Joglekar said...

जितना सुंदर चित्र उतनी ही सुंदर गज़ल ।

Kulwant Happy said...

अच्छी रचना पढ़कर मैंगेंबो खुश हुआ
बिनटिप्पणी चले जाओ ये अच्छा तो नहीं है

Hamid Siddharthi said...

aap is tarah ki gazal kah kar
logo ko pichhli yad dilai ye achcha to naheen hai

very nice poetry

kumar zahid said...

दिल तुम्हार नाजुक है यह मेरा दिल समझता है

याद करके धड़कन बढाओ ये अच्छा तो नहीं है


Nice ..

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "