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Tuesday, October 20, 2009

हिंदुस्तान जो की वादियों का देश है



अपना हिंदुस्तान जो की वादियों का देश है तो लीजिये कुछ पंक्तियां पेश हैं ...

वे देश मे अलगावादी की भूमिका निभाते हैं
खुद को एक समर्पित राष्ट्रवादी बताते हैं।

इस लोकतांत्रिक गणराज्य के, समाजवाद हिंदुस्तान के
स्वयम्भू साम्यवादी, जनवादी, मनुवादी, इत्यादि इत्यादि खुद को बताते हैं।

वैसे हमारा हिंदुस्तान सदियों से जकरा हुआ है,
ना जाने किन किन वादियों के बोझ से दुहरा हुआ है।

चुनाव मे जातिवादी,
नौकरी मे भाई-भातिजवादी,
वादियों मे आतंकवादी,

घाटियों मे उग्रवादी और
जंगलों मे नक्सलवादी।


हाय! हम और आप सिर्फ़ वादी और प्रतिवादी।

पाण्डेय जी कहते हैं इसके बाद भी एक वादी है जो सब पे भारी है
वो है बढ़ती हुई
आबादी॥


8 comments:

अम्बरीश अम्बुज said...

चुनाव मे जातिवादी,
नौकरी मे भाई-भातिजवादी,
वादियों मे आतंकवादी,
घाटियों मे उग्रवादी और
जंगलों मे नक्सलवादी।

हाय! हम और आप सिर्फ़ वादी और प्रतिवादी।

waise pandey ji bhi galat kahan kah rahe hain...

shikha varshney said...

काफी अलग सा अंदाज है आपके लेखन का.प्रभावित करता है..अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आना.

अभिषेक ओझा said...

वाद और वादियों का जामना है भाई !

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर लिखा आप ने लेकिन आबादी सब से बडी वादी है, सहमत जी

Suman said...

वे देश मे अलगावादी की भूमिका निभाते हैं
खुद को एक समर्पित राष्ट्रवादी बताते हैं।nice

GATHAREE said...

ek aur 'vaadi'hai jidhar ham jaa rahe hain-'BARBAADI"

अल्पना वर्मा said...

सही लिखा है...
वादी..वादी और वादी--का ज़माना है..

lekin युवा वर्ग इस मुद्दे को समझता है..इस समस्या को दूर करने के लिए कार्यरत है..और प्रतिबद्ध है..यह aap ki kavita ke ruup mein अच्छे संकेत हैं.

RAJNISH PARIHAR said...

bahut achhe.....

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "