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अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारमनसानां तु वसुधैव कुटुंबकम्

Sunday, November 30, 2008

सुनो नेताओं के गुणगान

राजनीत की रसोई में नित बनते नए पकवान
चुनावी हवा बह रही है सुनो नेताओं के गुणगान
सुनो नेताओं के गुणगान जो लगे हैं देश को बांटने
गली गली में घूम रहे हैं सिर्फ़ वोटरों को आंकने
कह सुलभ कविराय आज सुनलो सारे उम्मीदवार
सीधे नरक में जाओगे जो चुनोगे जाती-धर्म की दीवार ॥

- सुलभ 'सतरंगी'

Friday, November 28, 2008

भारत और आतंकवाद - लगता है हम असहाय हैं ...

कभी घुसपैठ तो कभी जेहाद और आतंकवाद
लगे हैं सबके सब करने भारत को बरबाद
भारत को बरबाद रोज हो रहा ख़ूनी खेल
ढुलमुल विदेश नीति की देखो रेलमपेल
कह सुलभ कविराय क्षमादान अब त्यागो
समय रहते आतंकवाद को जड़ से मिटादो

Wednesday, October 22, 2008

भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसके अन्दर महाराष्ट्र है।

भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसके अन्दर महाराष्ट्र है

मराठियों का सम्मान कैसे जब वहां ठाकरे राज है।

लगाया आग क्षेत्रवाद का फिर से जलने के लिए

टुटा मेरा सपना अखंड भारत पर मरने के लिए।

Monday, August 25, 2008

त्रासदी (भ्रष्ट्र तंत्र के ख़िलाफ़ आवाज़ )



उत्तर से लेकर दक्षिण तक
पूरब से लेकर पश्चिम तक

भिन्न भिन्न लोग हैं, मौसम है और
बहुत सी संस्कृति है.
विविधताओं से भरी अपने देश की धरती है.


फिर राजनीति के क्यूँ एक जैसे रंग हैं.
सबके इरादे नेक हैं.
जमकर खाइए, उनकी नीति एक है.


जब भी देश में कोई आपदा आई है
राहत के नाम पर हमारे नेताओं, अफसरों ने
अपनी
जेबों में चांदी उगाई है.

न्याय के लिए तरसते गरीब रहे सदा भूखे.
चाहे बिहार में आई हो बाढ़
या गुजरात में पड़े सूखे !!





लिंक विदइन

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "