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अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारमनसानां तु वसुधैव कुटुंबकम्

Monday, August 25, 2008

त्रासदी (भ्रष्ट्र तंत्र के ख़िलाफ़ आवाज़ )



उत्तर से लेकर दक्षिण तक
पूरब से लेकर पश्चिम तक

भिन्न भिन्न लोग हैं, मौसम है और
बहुत सी संस्कृति है.
विविधताओं से भरी अपने देश की धरती है.


फिर राजनीति के क्यूँ एक जैसे रंग हैं.
सबके इरादे नेक हैं.
जमकर खाइए, उनकी नीति एक है.


जब भी देश में कोई आपदा आई है
राहत के नाम पर हमारे नेताओं, अफसरों ने
अपनी
जेबों में चांदी उगाई है.

न्याय के लिए तरसते गरीब रहे सदा भूखे.
चाहे बिहार में आई हो बाढ़
या गुजरात में पड़े सूखे !!





3 comments:

अनुनाद सिंह said...

आपकी एक टिपण्णी देखी - पहले विपणन कीजिए, फ़िर प्रोडक्ट बनाइये. कभी इस पर और प्रकाश डालेंगे?

prayas said...

i don't knw u. U r really good person i can feel. Nd a patriot.
wht type of step do u think our leaders can take. Its too late now the cancer of society so called Muslims is already spread every where. So now its our responsibility to counter attack. I knw smwhere i m wrong But then i think to save nation we have to do this. They r terroist directly or indirectly. Some show us and the others backing them bcaz of our leaders. But every 1 is with pakistan not with us.... So to save our nation now we had to stand up..

सुलभ [Sulabh] said...

Dear Prayas,

I can understand your feelings about the situations in India. But thing is not correct as you are interpreting. Yes, we need to fight against corruption, regional-feelings and try to build a solid policy where no one can take undo advantages of our laws based on "DharmNirpeksha Bhaarat".

I am praying that every Indian should be made with vision "Nation First"

लिंक विदइन

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "