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Wednesday, September 8, 2010

अज़ब मुश्किल है

दिन प्रतिदिन उधेड़बुन बढ़ती जा रही, जो कहना चाह रहा था वो कह नहीं पा रहा हूँ. कुछ ऐसे ही हालात में जाने क्या कह गया. लीजिये एक छोटी सी बेबहर ग़ज़ल -


अज़ब मुश्किल है
दूर   मंजिल   है

रस्ता रोक कर
खड़ा क़ातिल है

भरोसा करूँ क्या ?
दोस्त  काबिल  है

मेरे   गुनाहों   में
तक़दीर शामिल है

बार बार फिसलता
आवारा एक दिल है

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है

- सुलभ 

51 comments:

honesty project democracy said...

वाह भाई वाह सुलभ जी ,वैसे आपके लिए मुश्किल तो कुछ भी नहीं क्योकि सोच में सच्चाई हो तो रास्ते निकल ही आते हैं ...

माधव said...

बढ़िया

शारदा अरोरा said...

उधेड़बुन भी शायरी की शक्ल ले लेती है ...

kshama said...

अज़ब मुश्किल है
दूर मंजिल है

रस्ता रोक कर
खड़ा क़ातिल है
Uf! Ye bhi kaisi uljhan hai!

पी.सी.गोदियाल said...

बार बार फिसलता
आवारा एक दिल है

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है

Sahee baat kahee aapne !

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब जी

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

जीवन के सत्य को इस छोटी सी बहर में बखूबी समेटा है आपने।
-------
साँप काटने पर क्या करें, क्या न करें?

दिगम्बर नासवा said...

मेरे गुनाहों में
तक़दीर शामिल है

बार बार फिसलता
आवारा एक दिल है
सुलभ जी ... छोटी बहर में अक्सर ग़ज़ल कहना बहुत मुश्किल होता है पर अपने बहुत अच्छे शेर निकले हैं ...

ये दोनो शेर बहुत ही लाजवाब बन पड़े हैं ....
और हाँ गुरुदेव के ब्लॉग पर आपकी ग़ज़ल बहुत ही कमाल थी ... आप और हम दोनो साथ थे ये मेरा सौभाग्य है ...

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

एतना बढिया तो गजल कह दिए हैं… भाव अऊर सब्द भी है अऊर सायरी भी है!! बधाई!

Mumukshh Ki Rachanain said...

लिखा गज़ब है
सब हासिल है

टिपण्णी दे रहा हूँ
स्नेह शामिल है

हार्दिक बधाई
चन्द्र मोहन गुप्त

डॉ टी एस दराल said...

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है

ग़ज़ल तो अच्छी बन पड़ी है ।

रचना दीक्षित said...

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है
शायरी मुश्किल है तब ये हाल है मुझसे से पूंछो मुझे तो आती ही नहीं है

Udan Tashtari said...

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है


-हो तो गई...बहुत बढ़िया.

महफूज़ अली said...

छोटी सी ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी...

अभिषेक ओझा said...

भाव हैं शब्द नहीं, उनसे कहना मुश्किल है. :)

Mahak said...

रस्ता रोक कर
खड़ा क़ातिल है

भरोसा करूँ क्या ?
दोस्त काबिल है

बार बार फिसलता
आवारा एक दिल है

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है



ज़नाब यह तो अजब के साथ-२ गजब मुश्किल है
बहुत खूब सुलभ जी

अगर समय हो तो यहाँ भी पधारें

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) said...

बहुत खूब ग़ज़ल कही है| ख्याल बुलंद हैं... पर मेरे जैसा नासमझ भी बहर की गलतियाँ पकड ले रहा है|

ब्रह्माण्ड

Parul said...

mushkil koi bhi..aap to 'sulabh' hi hai :)..sundar panktiyaan

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ...सुन्दर अभिव्यक्ति

RAJWANT RAJ said...

sulabh ji
bhav hai shbd nhi
shayri mushkil hai
bechargi bhi itni khoobsurti se bya ki hai ki kya dad de .
bhut sundar .

निर्मला कपिला said...

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है
मगर कम शब्दों मे भी इतनी सुन्दर शायरी कमाल है। बधाई।

विनोद कुमार पांडेय said...

छोटे मिसरे पर भाव गंभीर..बेहतरीन ग़ज़ल...धन्यवाद सुलभ जी

lokendra singh rajput said...

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है....
हमारे लिए थोड़ा मुश्किल है, लेकिन आपके लिए नहीं।

Gourav Agrawal said...

बहुत सुन्दर

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर said...

नमस्कार,
जन्मदिन की शुभकामनायें हम तक प्रेम, स्नेह में लिपट पर पहुँचीं.
मित्रों की शुभकामनायें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देतीं हैं.
आभार

Vivek VK Jain said...

sulabh ji, im impressed.......as this is ma frst visit....i will definitely
visit u again.

वीना said...

बहुत अच्छी गजल है...क्या शेर है

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है
छोटी बहर की गजल..बहुत खूब...जरूर फॉलो करूंगी..आप भी यहां जरूर आइए
http://veenakesur.blogspot.com/

वीना said...

बहुत अच्छी गजल है...क्या शेर है

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है
छोटी बहर की गजल..बहुत खूब...जरूर फॉलो करूंगी..आप भी यहां जरूर आइए
http://veenakesur.blogspot.com/

कुमार राधारमण said...

अच्छी ग़ज़ल है। काफी दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आया। पता चला कि इस बीच मैंने कितना कुछ मिस किया।

विनोद कुमार पांडेय said...

सुलभ जी....ये त बेहतरीन ..कुछ नये का इंतज़ार है भाई...

mridula pradhan said...

very good.

सतीश सक्सेना said...

अरे वाह ....
मज़ा आ गया , कुछ अलग ही लगी ! शुभकामनायें

ZEAL said...

.

@--दिन प्रतिदिन उधेड़बुन बढ़ती जा रही, जो कहना चाह रहा था वो कह नहीं पा रहा हूँ. कुछ ऐसे ही हालात में ....

ये उधेड़-बुन ही तो जीने की नयी राहें खोल देती हैं हमारे जीवन में।

.

VIJAY KUMAR VERMA said...

बार बार फिसलता
आवारा एक दिल है

भाव हैं शब्द नहीं
शायरी मुश्किल है
बहुत ही खूबसूरत पंक्ति ...
शायरी मुश्किल कहाँ आपने तो एकदम आसान कर दी ...बधाई

क्षितिजा .... said...

खूबसूरत रचना ...

मेरे गुनाहों में तकदीर शामिल है ..
वाह!! बहुत खूब ...

आपने मेरे ब्लॉग पर दर्शन दिए उसके लिए भी शुक्रिया

आपकी रचना मुझे बेहद पसंद आई ...आगे भी पढना चाहूंगी इसलिए फौलो कर रही हूँ ..
शुभकामनाएं

शरद कोकास said...

बहर मे भी है और गज़ल भी

lori said...

एक गंभीर रचना बहुत प्यारी!!!
कभी भटकते भटकते " आवारगी" पर भी नज़र -ऐ--इनायत करें.

Shailesh Gupta ( शैलेश गुप्ता ) said...

:)

खबरों की दुनियाँ , भाग्योत्कर्ष said...

्सम्हल ए दिल वरना होगी गजब मुश्किल ।

हमारीवाणी.कॉम said...

हॉट सेक्शन अब केवल अधिक 'पढ़े गए' के आधार पर कार्य करेगा

ब्लॉग जगत में अच्छे लेखन को प्रोत्साहन की जगह केवल टिप्पणियों की चाह एवं गलत तरीकों से की गई टिप्पणियों के बढ़ते चलन की जगह अच्छी रचनाओं को प्रोत्साहन के प्रयास एवं रचनाओं को लोगों की पसंद के हिसाब से ही हॉट सेक्शन में लाने का प्रयास किया जा रहा है. हॉट सेक्शन के प्रारूप में बदलाव करते हुए अधिक टिप्पणियां वाला सेक्शन 'टिप्पणिया प्राप्त' हटा दिया गया है तथा अब यह सेक्शन 'पढ़े गए' के आधार पर कार्य करेगा.

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JHAROKHA said...

bahut hi khoob-surat post.
poonam

mridula pradhan said...

achcha likhe hain.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

अजी, भाव ज्यादा ज़रूरी है ... शब्द तो आते जाते रहते हैं ...
सुन्दर !

विनोद कुमार पांडेय said...

क्या भैया बहुत दिन से खामोश हैं..बहुत बिज़ी चल रहें है क्या..कुछ नया पेश कीजिए...

निर्झर'नीर said...

भरोसा करूँ क्या ?
दोस्त काबिल है

awaysome lines ..gagar mein sagar ki tarah hai ye do panktiyan .

daad hazir hai kubool karen

deepak said...

nice one.

deepak said...
This comment has been removed by the author.
Vivek VK Jain said...

it was my 1st visit.....n really impresssive writing.
shayari sach me mushkil hai, mitr.

mridula pradhan said...

bahot achchi lagi.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

सुलभ भाई, इतनी छोटी बहर और इतना कातिलाना अंदाज। बस दो ही शब्‍द कहूँगा- जय हो।

---------
सुनामी: प्रलय का दूसरा नाम।
चमत्‍कार दिखाऍं, एक लाख का इनाम पाऍं।

प्रज्ञा पांडेय said...

bahut sundar !!!

लिंक विदइन

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "