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अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारमनसानां तु वसुधैव कुटुंबकम्

Saturday, August 15, 2009

स्वाधीनता दिवस और हमारी विदेश नीति

सन 62 का चीन लिखूं या आज 62वां हिन्दुस्तान लिखूं.
सन सैतालिस से धोखा खाते कितना पाकिस्तान लिखूं.
हिंदी-चीनी भाई-भाई, कह कर पीठ में छुरा घोपा
अरुणाचल पर अतिक्रमण या कश्मीर में कब्रिस्तान लिखूं.

- सुलभ

3 comments:

अर्चना तिवारी said...

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएँ...जय हिंद !!

August 15, 2009

Babli said...

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें!

अविनाश वाचस्पति said...

सिर्फ नापाक लिखें

और लिखने की तो

जरूरत ही नहीं है।

लिंक विदइन

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "