लोकतंत्र की दरिया में बहती धन की मलाई
उपरवाले जमकर खाते हमको कुछ नही भाई
हमको कुछ नही भाई देखकर मन रोया
विधाता तुमने लोकतंत्र में कैसा बिज़ बोया
कह 'सुलभ' कविराय छोड़ो कविता वाचन
थाम लो राजनीत का जैसे भी हो दामन ॥
Tuesday, July 22, 2008
कठघरे में लोकतंत्र (विश्वास मत)
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
12:24 PM
0
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Tuesday, March 25, 2008
यादों का इन्द्रजाल... Poetry by Sulabh Jaiswal: एक सुलभ सर्वसुलभ
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
1:39 PM
1 टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Monday, March 24, 2008
मस्त फाल्गुनी हवाओं की गुनगुनाती होली आयी...
रंगभरी मस्ती मे डूबी मस्तानों की टोली आयी
मस्त फाल्गुनी हवाओं की गुनगुनाती होली आयी ।
गली गली मे रौनक है घर मे हो रहा हंगामा
जिसको देखो वही रंगीन जीजा भाभी या हो मामा ।
छक कर खाओ पुवे पकवान लस्सी और मिठाई
नाचो गाओ और बजाओ ढोलक मंझीरे शहनाई ।
हर जीवन में बनी रहे यही उमंग यही तरंग
अपना पराया किसे कहें हर किसी पे डाले रंग ॥
- सुलभ जायसवाल
२२ मार्च २००८
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
7:29 PM
2
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
पट्टियाँ (Labels for Hindi Poems):
Holi Special,
होली विशेष
Friday, June 22, 2007
तेरी याद लिए आती हैं।
रात आती है तेरी याद लिए आती है
यादों की रंगीन बरात लिए आती है
यह मुश्किल है कि तेरी याद ना आये
कैसे भूलूं वो मुलाक़ात लिए आती है ।
यादों के भंवर मे किनारा नही मिलता
आसमा मे दुसरा सितारा नही मिलता
तनहा दिल है मेरा तेरे इंतज़ार मे
जीने का और सहारा नही मिलता।
कोशिश तुम्हारे पास आने की है
प्यार भरे दिल मे समाने की है
ये दूरियां कब ख़त्म होगी
एहसास जवा तुम्हे पाने की है।
और इंतज़ार बेक़रार किये जाती है
नींद भी मुझसे इनकार किये जाती है
आँखों मे सिर्फ तेरे ख्वाब लिए आती है
रात आती है और तेरी याद लिए आती है।
यादों की रंगीन बरात लिए आती है
यह मुश्किल है कि तेरी याद ना आये
कैसे भूलूं वो मुलाक़ात लिए आती है ।
यादों के भंवर मे किनारा नही मिलता
आसमा मे दुसरा सितारा नही मिलता
तनहा दिल है मेरा तेरे इंतज़ार मे
जीने का और सहारा नही मिलता।
कोशिश तुम्हारे पास आने की है
प्यार भरे दिल मे समाने की है
ये दूरियां कब ख़त्म होगी
एहसास जवा तुम्हे पाने की है।
और इंतज़ार बेक़रार किये जाती है
नींद भी मुझसे इनकार किये जाती है
आँखों मे सिर्फ तेरे ख्वाब लिए आती है
रात आती है और तेरी याद लिए आती है।
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
5:00 PM
0
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
पट्टियाँ (Labels for Hindi Poems):
Love Poem,
प्रेम कविता
Subscribe to:
Posts (Atom)