Showing posts with label ग़ज़ल. Show all posts
Showing posts with label ग़ज़ल. Show all posts
Wednesday, May 11, 2011
सवाल बहुत है
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
9:53 AM
21
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
पट्टियाँ (Labels for Hindi Poems):
Ghazal,
Hindi poem,
ग़ज़ल
Monday, March 7, 2011
शिकवे सारे मन के धो ले
आँखों से वे जब भी बोले
राज वफ़ा के अपने खोले
दिल से दिल की बात हो गई
चुपके चुपके धीमे हौले
कैसे भूलूँ अपना बचपन
चार आने के चार टिकोले
(मेरे छोटे शहर अररिया जिला की स्थिति )
फसलें सूखी, भीगे सपने
बाढ़ से पहले बरसे शोले
पल में माशा पल में तोला
एक इंसां के कई कई चोले
छोटी छोटी गजलों में तू
सुंदर सुंदर शब्द पिरो ले
दुनिया भर के सुख को समेटे
देख साधू के सिर्फ एक झोले
बरसों बाद मिले हैं अपने
शिकवे सारे मन के धो ले
हाले दिल 'सुलभ' लिक्खा कर
पढ़ कर मन तो हल्का हो ले ||
राज वफ़ा के अपने खोले
दिल से दिल की बात हो गई
चुपके चुपके धीमे हौले
कैसे भूलूँ अपना बचपन
चार आने के चार टिकोले
(मेरे छोटे शहर अररिया जिला की स्थिति )
फसलें सूखी, भीगे सपने
बाढ़ से पहले बरसे शोले
पल में माशा पल में तोला
एक इंसां के कई कई चोले
छोटी छोटी गजलों में तू
सुंदर सुंदर शब्द पिरो ले
दुनिया भर के सुख को समेटे
देख साधू के सिर्फ एक झोले
बरसों बाद मिले हैं अपने
शिकवे सारे मन के धो ले
हाले दिल 'सुलभ' लिक्खा कर
पढ़ कर मन तो हल्का हो ले ||
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
2:06 PM
20
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Sunday, November 7, 2010
दास्ताँ-ए-इश्क दौरान-ए-ग़ज़ल
युनिवर्सल ट्रूथ की तरह कुछ पंक्तियाँ अजर अमर है, जैसे ये शेर "ये इश्क नही आसां इतना समझ लिजिये, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है." जहाँ इश्क इबादत है वहीं कुछ परंपराएं भी हैं.
इन दिनो ग़ज़लों का मौसम है, मन मे उत्साह है. प्रस्तुत है कुछ पंक्तियां जिसे "दास्ताने इश्क दौराने ग़ज़ल" कह सकते हैं.
इन दिनो ग़ज़लों का मौसम है, मन मे उत्साह है. प्रस्तुत है कुछ पंक्तियां जिसे "दास्ताने इश्क दौराने ग़ज़ल" कह सकते हैं.
तोबा ये तकरार की बातें
इश्क मे जित-हार की बातें
हुस्न शोला, है अदा कातिल
इश्क मे हथयार की बातें
जिगर यारों थाम के रखना
इश्क मे इन्कार की बातें
जुबाँ चुप औ' दिल है बेकाबू
इश्क मे इज़हार की बातें
सोना चाँदी ना मोती मूंगा
इश्क मे दिलदार की बातें
वफ़ा वादे दोस्ती कसमे
इश्क मे ऐतबार की बातें
सनम की यादे गमे-जुदाई
इश्क मे इंतजार की बातें
सितमग़र जुल्मी बेवफाई
इश्क मे हैं ख़ार की बातें
लैला मजनूँ फ़रहाद शीरी
इश्क में किरदार की बातें
इश्क मे जित-हार की बातें
हुस्न शोला, है अदा कातिल
इश्क मे हथयार की बातें
जिगर यारों थाम के रखना
इश्क मे इन्कार की बातें
जुबाँ चुप औ' दिल है बेकाबू
इश्क मे इज़हार की बातें
सोना चाँदी ना मोती मूंगा
इश्क मे दिलदार की बातें
वफ़ा वादे दोस्ती कसमे
इश्क मे ऐतबार की बातें
सनम की यादे गमे-जुदाई
इश्क मे इंतजार की बातें
सितमग़र जुल्मी बेवफाई
इश्क मे हैं ख़ार की बातें
लैला मजनूँ फ़रहाद शीरी
इश्क में किरदार की बातें
- सुलभ
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
9:30 AM
24
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Friday, May 28, 2010
शुरू करो उपवास रे जोगी
जब तक चले श्वास रे जोगी
रहना नज़र के पास रे जोगी
बंधाकर सबको आस रे जोगी
कौन चला बनवास रे जोगी
हर सू फ़र्ज़ से सुरभित रहे
घर दफ्तर न्यास रे जोगी
सदियों तक ना प्यास जगे
यूँ बुझाओ प्यास रे जोगी
टूटे हिम्मत फिर से जुड़ेंगे
खोना मत विश्वास रे जोगी
जो भी पहना दिखता सुन्दर
तहजीब का लिबास रे जोगी
वही पुराने भाषण मुद्दे
कुछ भी नहीं ख़ास रे जोगी
कुछ भी नहीं ख़ास रे जोगी
प्याज-चीनी सब महंगा है
शुरू करो उपवास रे जोगी
-सुलभ
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
5:24 PM
37
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Saturday, April 24, 2010
तोहरा से नज़र मिलाईं कईसे (भोजपुरी ग़ज़ल)
देखाईं कईसे जताईं कईसे
हमरो अकिल बा बताईं कईसे
नासमझ के समझाईं कईसे
आँख खुलल बा जगाईं कईसे
अकेले सफ़र में गाईं कईसे
उदास मन बा खाईं कईसे
घाव करेजा के छुपाईं कईसे
पुरनका याद भुलाईं कईसे
तोहरा से नज़र मिलाईं कईसे
'सुलभ' झूट शान देखाईं कईसे
(अकिल=अक्ल, करेजा=दिल)
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
2:46 PM
24
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
पट्टियाँ (Labels for Hindi Poems):
bhojpuri ghazal,
ग़ज़ल
Thursday, March 11, 2010
दर्द अपना मिल कर बाँट लेंगे
दर्द अपना मिल कर बाँट लेंगे
ये जिंदगी प्यार से काट लेंगे
ज़रा आसमान से उतर कर देखो
खाई गहरी नहीं है पाट लेंगे
सब अपने ही खेत से निकले हैं
जो सड़े हैं उनको छांट लेंगे
राजा कबतक महल में टिकेगा
(दिखावा कबतक चेहरे पे टिकेगा)
(दिखावा कबतक चेहरे पे टिकेगा)
वक़्त के दीमक सब चाट लेंगे
- सुलभ
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
9:00 AM
39
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Friday, February 5, 2010
उठो सुबह हो चुकी चमक रहा आफताब देखो
इससे पहले कि गीली आँखों में तेज़ाब देखो
होश में आओ रहनुमाओं वर्ना इंकलाब देखो
हक़ मार जाते हो तुम अपने ही खिदमतगार के
रगों में इसके खून नहीं सुलगता अलाव देखो
जंगल पहाड़ उजाड़ कर ये कैसी तरक्की पाई है
चार दिन कि जिंदगी में कुदरत के सौ अज़ाब देखो
जमीन मकान आसमान सब यहाँ बेमानी है
हवा पानी को तरस रहे शहर बेहिसाब देखो
महफ़िल कैसे सजे यहाँ तेल खरीदने की कूबत नहीं
महंगाई के आगे हार गए कितने रईस नवाब देखो
सच को झूट बनाने का खेल और नहीं खेल सकते
प्यार भरे तिरे सवाल के आगे हम हुए लाजवाब देखो
खोल दो बंद दरवाजे खिड़कियाँ औ' रोशनदानों को
उठो सुबह हो चुकी चमक रहा आफताब देखो ||
होश में आओ रहनुमाओं वर्ना इंकलाब देखो
हक़ मार जाते हो तुम अपने ही खिदमतगार के
रगों में इसके खून नहीं सुलगता अलाव देखो
जंगल पहाड़ उजाड़ कर ये कैसी तरक्की पाई है
चार दिन कि जिंदगी में कुदरत के सौ अज़ाब देखो
जमीन मकान आसमान सब यहाँ बेमानी है
हवा पानी को तरस रहे शहर बेहिसाब देखो
महफ़िल कैसे सजे यहाँ तेल खरीदने की कूबत नहीं
महंगाई के आगे हार गए कितने रईस नवाब देखो
सच को झूट बनाने का खेल और नहीं खेल सकते
प्यार भरे तिरे सवाल के आगे हम हुए लाजवाब देखो
खोल दो बंद दरवाजे खिड़कियाँ औ' रोशनदानों को
उठो सुबह हो चुकी चमक रहा आफताब देखो ||
***
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
3:00 PM
17
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Friday, January 15, 2010
इजहारे जज़्बात की ज़हमत कीजिये
इजहारे जज़्बात की ज़हमत कीजिये
मोहब्बत की है तो हिम्मत कीजिये
खुदा के रहमत से कायम मोहब्बत
सजदे में सर रख इबादत कीजिये
मोहब्बत की मंजिल है इम्तहान लेगी
ना उफ़ ना कोई शिकायत कीजिये
माना की मोहब्बत में खामोश है जुबाँ
चाहें तो निगाहों से शरारत कीजिये
रंजिश साज़िश हिमाकत नफ़रत
मोहब्बत के दुश्मन हैं खिलाफत कीजिये
मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत
हर शख्स को मिले ऐसी चाहत कीजिये
दूर दिलों तक पहुंचे 'सुलभ' तेरे अलफ़ाज़
मोहब्बत में यारो खतो-किताबत कीजिये
- सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
6:30 PM
21
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
पट्टियाँ (Labels for Hindi Poems):
Ghazal,
Love Poem,
mohabbat gazal,
ग़ज़ल
Monday, December 28, 2009
इस जमाने के अन्दर तो जमाने बहुत हैं
अनजान शहर में मिले खजाने बहुत हैं
खेल किस्मत को अभी दिखाने बहुत हैं
हर कदम टूटते हैं सैकडो दिल यहाँ
टूटे बिखरे दिलों के अफ़साने बहुत हैं
कुर्सी के पिछे दौड़कर सभी बावले हुए
इक नाजनीन के देखो दीवाने बहुत हैं
नक़ाब बदल बदल कर जो करते हैं घात
उनको ढुढेंगे कहाँ जिनके ठिकाने बहुत हैं
शायद चलती रहे महफिल देर रात तक
तेरे सामने साकी अभी पैमाने बहुत हैं
पत्थरों से मुलाक़ात अब रोज़ की बात है
आँखों ने भी बसाए ख्वाब सुहाने बहुत हैं
किस किस की दास्ताँ सुनोगे तुम 'सुलभ'
इस जमाने के अन्दर तो जमाने बहुत हैं
- सुलभ जायसवाल
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
5:47 PM
25
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Saturday, December 19, 2009
वो हंस दिए हमारी नादानी देखकर - एक कचोटती ग़ज़ल
दो गवाह और झूटी कहानी देखकर
लिख सजा बेगुनाह को कलम है शर्मशार
फैसले हुए हैं कागज़ कानूनी देखकर
ख्वाहिशों कि उड़ान अभी बाकी है बहुत
मियाँ घबरा गए ढलती जवानी देखकर
जाने क्या देखकर जाने क्या सोचकर
फूल मुरझा गए सख्त निगरानी देखकर
वहां न कोई भेड़िया था न कोई दरिंदा
गुड़िया रोई थी चेहरा इंसानी देखकर
खालिश डिग्री दिखाकर मांगी थी नौकरी
वो हंस दिए हमारी नादानी देखकर
सुबह चल निकला था घर से प्यासा ही
राहत मिली अब रस्ते में पानी देखकर
***
- सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
11:30 AM
27
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Friday, December 11, 2009
टिप्पणी कीजिये खूब कोई शरारत ना कीजिये - ग़ज़ल
जैसा की आप सभी जानते हैं पिछले एक महीने से अपने प्यारे ब्लॉगजगत में कुछ उलजलूल हरकतें और अनावश्यक बहसे हुई हैं. दुखी होकर मैंने एक Post जारी किया था "शान्ति के लिए यह सन्देश आत्मसात करें " बहुतों ने इसकी सराहना की तो कुछ ने असहमति जताते हुए अपना पक्ष रहा जवाब में मैंने भी यथोचित बहस " मानवता के दुश्मन ब्लोगिंग से दूर रहें." कर मामले को नतीजे पर पहुंचा कर सभी से जिम्मेदार लेखन की अपील की.
एक खबर सुन पढ़कर आज फिर मर्माहत हो गया हूँ. अब क्या करूँ न चाहते हुए भी आज एक ग़ज़ल (अपने सतरंगी अंदाज से अलग) कुछ इस तरह कहना पड़ रहा है -
इजहारे- खुराफात की ज़हमत ना कीजिये
खो जाये अमन-चैन ऐसी जुर्रत ना कीजिये
जब ठेस लगे दिल पर शिकायत दर्ज कीजिये
बहस कीजिये खुल कर अदावत ना कीजिये
कलम चलाने के लिए यहाँ मुद्दे भरपूर हैं
महज दिखावे के वास्ते खिलाफत ना कीजिये
ये भारत वर्ष है अपना गौरवशाली हिन्दोस्ताँ
जाति-धरम के नाम पर सियासत ना कीजिये
जरुरी नहीं जो दिखता है वो ही लिखता है
इस्तकबाल लाजिमी है इबादत ना कीजिये
ब्लॉगरी कोई खेल नहीं बस इतना ख्याल रहे
टिप्पणी कीजिये खूब कोई शरारत ना कीजिये
- सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
10:37 AM
26
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
पट्टियाँ (Labels for Hindi Poems):
Gazal,
Happy Bloging,
ग़ज़ल
Sunday, December 6, 2009
राह चलते एक छोटी सी ग़ज़ल
आंधियां जब तेज रही थी
टहनियों में खलबली थी
दरख़्त वही जगह पर रहे
जड़े जिनकी खूब गहरी थी
खुद को घायल पाया हमने
हुस्न से जब नज़र मिली थी
एक मुलाक़ात में दिल दे बैठे
नाजनीन वो बड़ी हसीं थी
सुबह तक डूबा रहा सूरज
जाड़े की एक रात बड़ी थी
सब ने अपने होश गंवाये
ऐसी तो उसकी जादूगरी थी
तंग गलियों से जब मैं निकला
देखा तब एक सड़क खुली थी
- सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'
(लेखक को gazal बहर की जानकारी का अभाव है)
(लेखक को gazal बहर की जानकारी का अभाव है)
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
11:00 AM
34
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Saturday, November 28, 2009
मेरी याद में देखना परीशाँ तुम होगे - ग़ज़ल
अभी हाल ही में मेरे किसी शुभचिंतक ने मुझे मुफ्त की सलाह बांटने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है. मैं परेशान, आख़िर मान लिया की गलती मेरी ही है. जाने अनजाने कुछ शे'र लिखे चले गए. आज की यह ग़ज़ल उसी शुभचिंतक के नाम पेश है -
अपनी जमीं के वास्ते आसमां तुम होगे
करोगे जुर्म कोई तो गवाह तुम होगे
बातबात पे ऐब ढूंढ़ना अच्छी बात नहीं
आइना जब देखोगे पशेमाँ तुम होगे
सलाह लाख दुरुस्त हो फिजूल मत बांटो
बदनाम एक दिन ख्वामखाह तुम होगे
फूलों के बीच बैठे हो काँटों से दिल लगाओ
मुमकिन है इस बाग़ के बागबाँ तुम होगे
ये माँ की दुआएं हैं कभी साथ न छोड़ेगी
साया तुम्हारा होगा वहां जहाँ तुम होगे
अपने माज़ी को हम भुला नहीं पाये हैं
मेरी याद में देखना परीशाँ तुम होगे ॥
(पशेमाँ = शर्मिंदा, माज़ी = अतित )
- सुलभ
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
9:05 PM
14
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
Sunday, September 20, 2009
चाँद भी सजदे में है (ग़ज़ल)
आज रमजान का महिना भी गुजर गया और दशहरा प्रगति पर है। घर से दूर अकेले नए जगह में त्यौहार के रोमांच का पता न चला। हाँ यदि घर पर होता तो ईद साथियों के साथ खूब जमती । ख़ैर आज इस मौके पे आप सभी के खिदमत में एक ग़ज़ल अर्ज़ करता हूँ।

रंज ओ गम अपने सारे भुला दो भाई
किसी से नफरत नही है बता दो भाई।
अपने वतन के वास्ते कितने वफादार हैं
राह में आए गद्दारों को यह दिखा दो भाई।
जब गूंजती हो शहनाई पड़ौसी के आँगन में
गीत तुम भी एक कोई गुनगुना दो भाई ।
झूटे नही थे बचपन की सेवइयां और मेले
गले लगके चाचा के अदावतें मिटा दो भाई।
बेहद पाक मंजर है, चाँद भी सजदे में है
शम्मा मुहब्बत का तुम भी जला दो भाई।।

रंज ओ गम अपने सारे भुला दो भाई
किसी से नफरत नही है बता दो भाई।
अपने वतन के वास्ते कितने वफादार हैं
राह में आए गद्दारों को यह दिखा दो भाई।
जब गूंजती हो शहनाई पड़ौसी के आँगन में
गीत तुम भी एक कोई गुनगुना दो भाई ।
झूटे नही थे बचपन की सेवइयां और मेले
गले लगके चाचा के अदावतें मिटा दो भाई।
बेहद पाक मंजर है, चाँद भी सजदे में है
शम्मा मुहब्बत का तुम भी जला दो भाई।।
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
10:53 PM
11
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
पट्टियाँ (Labels for Hindi Poems):
Ghazal,
hindi urdu ghazal,
ग़ज़ल
Wednesday, September 2, 2009
इक जरूरी सवाल मियाँ (ग़ज़ल)

ज़रा भीड़ से हट कर तो देखो हाल मियाँ
तेज बहुत हो गयी है जमाने की चाल मियाँ
बेइंतिहा लगे हैं दौर में बाजारों को समेटने
पर घर में नहीं महफूज़ किसी का माल मियाँ
सियासत में कदम रखा और जादूगर बन गए
दिखा रहे हैं एक से बढ़कर एक कमाल मियाँ
कितने छाले पड़े हाथों में अब दिखा रौनके-ए-चमन
एक फूल आज तोड़ी तो उस पे हुआ बवाल मियाँ
अब चराग ढूँढता हूँ के थोड़ी रौशनी मिले
अँधेरे में खो गया इक जरूरी सवाल मियाँ ॥
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
1:30 PM
9
टिप्पनियाँ (comments) अपनी प्रतिक्रिया दें...
पट्टियाँ (Labels for Hindi Poems):
hindi urdu ghazal,
ग़ज़ल
Subscribe to:
Posts (Atom)



