Wednesday, May 11, 2011
सवाल बहुत है
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
9:53 AM
21
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ग़ज़ल
Monday, March 28, 2011
एक नयी क्रान्ति की शुरुवात...
(कार्य की अधिकता के कारण पोस्ट पब्लिश करने में थोडा विलम्ब हुआ है.)
अमर शहीद भगत सिंह तो हमारे दिल में रहते हैं, जिन्होंने कहा था "क्रांति का मतलब यह नहीं कि हम सिर्फ संघर्ष के लिए उत्प्रेरित करें और ना ही ये कभी किसी के व्यक्तिगत प्रतिशोध का माध्यम बने. यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं है. क्रांति इसलिए जरुरी है जहाँ से एक बेहतर नींव पर व्यवस्थित समाज के पुनर्निर्माणके लिए कार्यक्रम चलाये जाएं."ये ऐसी बातें है जो मुझे सदैव प्रेरित करती है राष्ट्रहित में चिंतन करने एवं कुछ योगदान करने के लिए, फलस्वरूप हाल ही में मैंने कुछ गंभीर कार्य करने का मन बनाया है, अब उस दिशा में अग्रसर भी हूँ. "बातें बिजनस की" सीरीज को आगे बढाते हुए पोस्ट यहाँ प्रस्तुत है - हम हैं भारत के पढ़े लिखे मूरख नौजवान.
बहरहाल इस साल की होली भी यादगार रही. नए कार्यस्थल पर नए साथियों के बीच केवल शब्दों से होली खेली गयी. एक में दर्जन का मजा उठाया. आजकल हास्य लिखने की कोशिश करता हूँ तो मामला कुछ जम नहीं पाता. फिर भी एक सामयिक ताजा शेर आप सबकी ओर फेंकता हूँ.
"इन्टरनेट में फंसे और सरेआम हो गए
एक क्लिक किया और बदनाम हो गए
ख़त नोटिस समाचार बधाई विज्ञापन
इमेल के बौछार में सब स्पाम हो गए "
एक क्लिक किया और बदनाम हो गए
ख़त नोटिस समाचार बधाई विज्ञापन
इमेल के बौछार में सब स्पाम हो गए "
- सुलभ
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
12:40 AM
10
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Saturday, March 19, 2011
~~~वाह होली वाह~~~
सब से पूछ रहे हैं - आज तारीख केतना है, और कौन दिनवा होली है.
लेकिन कोई ब्लोगर कुछ बता नहीं रहा है. जब तक कोई बताता नहीं है तब तक हम यहीं बैठ के भांग घोटल लस्सी पीते रहेंगे.
तब तक आप लोगन गीत सुनिए...
रंग भरी पिचकारी पिया
तुमने जो चलाई
अंग अंग भीग गया
रंगों से नहाई.
झूम रही बागों में कलियाँ
डाली डाली बौराई
मस्त फागुनी हवाओं की
गुनगुनाती होली आई
रंगों से सराबोर हुई
मेरी सूरत भोली
मैं तो तुमसे हारी 'सुलभ'
और न करो ठिठोली
प्रीत का रंग बरसाना
मेरे जीवन भर हमजोली
रहूँ सदा तेरी बाहों में
मिटे न प्रेम की रोली।
(~~~बधाई~~~बधाई~~~बधाई~~~)
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
8:08 PM
21
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2011,
Holi Special
Monday, March 7, 2011
शिकवे सारे मन के धो ले
आँखों से वे जब भी बोले
राज वफ़ा के अपने खोले
दिल से दिल की बात हो गई
चुपके चुपके धीमे हौले
कैसे भूलूँ अपना बचपन
चार आने के चार टिकोले
(मेरे छोटे शहर अररिया जिला की स्थिति )
फसलें सूखी, भीगे सपने
बाढ़ से पहले बरसे शोले
पल में माशा पल में तोला
एक इंसां के कई कई चोले
छोटी छोटी गजलों में तू
सुंदर सुंदर शब्द पिरो ले
दुनिया भर के सुख को समेटे
देख साधू के सिर्फ एक झोले
बरसों बाद मिले हैं अपने
शिकवे सारे मन के धो ले
हाले दिल 'सुलभ' लिक्खा कर
पढ़ कर मन तो हल्का हो ले ||
राज वफ़ा के अपने खोले
दिल से दिल की बात हो गई
चुपके चुपके धीमे हौले
कैसे भूलूँ अपना बचपन
चार आने के चार टिकोले
(मेरे छोटे शहर अररिया जिला की स्थिति )
फसलें सूखी, भीगे सपने
बाढ़ से पहले बरसे शोले
पल में माशा पल में तोला
एक इंसां के कई कई चोले
छोटी छोटी गजलों में तू
सुंदर सुंदर शब्द पिरो ले
दुनिया भर के सुख को समेटे
देख साधू के सिर्फ एक झोले
बरसों बाद मिले हैं अपने
शिकवे सारे मन के धो ले
हाले दिल 'सुलभ' लिक्खा कर
पढ़ कर मन तो हल्का हो ले ||
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
2:06 PM
20
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