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अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारमनसानां तु वसुधैव कुटुंबकम्
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Thursday, January 14, 2010

मकर संक्रांति की पावन सुबह है ये सभी को बधाई!



प्रातः स्नान
सूर्य नमस्कार
दान चावल स्पर्श
सबके नाम से सीधा (दान)
तिल गुड का भोग
नाना प्रकार के लाइ






मकर संक्रांति की पावन सुबह है ये
सभी को बधाई!






दही चुडा भोजन
पतंगे गुल्ली डंडा
संध्या स्वादिष्ट खिचड़ी
तरकारी, पापड़, चोखा...


Monday, January 4, 2010

छोटी सी ठंडी एक कविता

आज ठण्ड और कोहरा इतना ज्यादा है की पोस्ट लिखना तो दूर पोस्ट पढना भी मुश्किल हो रहा है.
शुक्र है एक छोटी सी कविता पढने को मिली, तो मैंने भी आज एक छोटी कविता कह दी.





 सुबह देर तक
बंद रहे किवाड़
ठण्ड में सूरज भी कहाँ निकला 


-सुलभ
  

Wednesday, December 16, 2009

चित्र कविता - 2 (एक ग़ज़ल)

पिछले दिनों नीरज जी की पोस्ट में यह चित्र देखा था. बहुत कुछ कह रहें है ये सजीव चित्र. इसे देखकर स्वतः ही लेखनी चल पड़ी
हँसते बोलते कहीं खो जाओ ये अच्छा तो नहीं है
अपने मन को बस दुखाओ ये अच्छा तो नहीं है

मैं जानता हूँ मेरी जाँ मैं तुमसे दूर हूँ बहुत
सोचकर यही तुम घबराओ ये अच्छा तो नहीं है

दिल तुम्हार नाजुक है यह मेरा दिल समझता है
याद करके धड़कन बढाओ ये अच्छा तो नहीं है

सफ़र से लौटूंगा जब भी पास तुम्हारे ही आऊंगा
इंतजार में आंसू बहाओ ये अच्छा तो नहीं है

लिंक विदइन

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जिंदगी हसीं है -
"खाने के लिए ज्ञान पचाने के लिए विज्ञान, सोने के लिए फर्श पहनने के लिए आदर्श, जीने के लिए सपने चलने के लिए इरादे, हंसने के लिए दर्द लिखने के लिए यादें... न कोई शिकायत न कोई कमी है, एक शायर की जिंदगी यूँ ही हसीं है... "