दो गवाह और झूटी कहानी देखकर
लिख सजा बेगुनाह को कलम है शर्मशार
फैसले हुए हैं कागज़ कानूनी देखकर
ख्वाहिशों कि उड़ान अभी बाकी है बहुत
मियाँ घबरा गए ढलती जवानी देखकर
जाने क्या देखकर जाने क्या सोचकर
फूल मुरझा गए सख्त निगरानी देखकर
वहां न कोई भेड़िया था न कोई दरिंदा
गुड़िया रोई थी चेहरा इंसानी देखकर
खालिश डिग्री दिखाकर मांगी थी नौकरी
वो हंस दिए हमारी नादानी देखकर
सुबह चल निकला था घर से प्यासा ही
राहत मिली अब रस्ते में पानी देखकर
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- सुलभ जायसवाल 'सतरंगी'

