
लहरों के ऊपर लड़ते कश्ती देखो तो ज़रा
जिंदगी-मौत के बीच मस्ती देखो तो ज़रा
दौड़ते हैं कदम बर्फ पर हाथों में बारूद लिये
दूर सरहद जज्बा-ए-वतनपरस्ती देखो तो ज़रा
साथ चलते बाशिंदों से ये कहाँ की नफरत है
बात बात पे जलते हैं बस्ती देखो तो ज़रा
हुस्न है; तो नाज़ नखरों के गहने भी होंगे
नासमझ दीवानों की ज़बरदस्ती देखो तो ज़रा
शहरों में आपाधापी किराये की छत के लिए
किसानों की जमीं है सस्ती देखो तो ज़रा
कौन अपना रहनुमा यहाँ क्या हो मुस्तकबिल
सियासत में लूटेरों की गश्ती देखो तो ज़रा ||
(रहनुमा = Leader मुस्तकबिल = Future) [इस post पर आपकी प्रतिक्रिया]

