1.
दिल्ली भी थर्राया, जयपुर बंगलोर भी थर्राई
इस साल खुनी खेल में मुंबई भी नहाई
क्या याद करे क्या बात करे साल 2008 की
जश्न अधुरा नए साल का हर दिल में है खौफ समाई.
2.
इस बीच इंडियन क्रिकेट का ऐसा कायापलट हुआ
ICL और IPL का मुकाबला भी गज़ब हुआ
क्रिकेट के आगे फुटबॉल हॉकी पानी भरते रहे
धोनी नम्बर 1 सीढियाँ ऊपर चढ़ते रहे.
3.
विश्व-अर्थव्यवस्था की बिगड़ी ऐसी चाल
मार्केट गिरा मुंह के बल आया ऐसा भूचाल
आया ऐसा भूचाल अमेरिका भी हारा
रिजर्व बैंक हो या वर्ल्ड बैंक सब बेचारा
कहत सुलभ कविराय कोई उपाय न सूझे
रोजगार के हजारो दीये पलभर में बूझे
Wednesday, December 31, 2008
साल 2008
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
4:34 PM
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Tuesday, December 23, 2008
सुप्रभात (Good Morning)

सूर्य की पहली किरण से आज मैंने साक्षात्कार किया
बिखड़े आत्मविश्वास को समेट पुनः विचार किया
हे परमात्मा, मेरे दृढ़ इच्छाशक्ति को बनाए रखना
रहूँ सदा कर्तव्यपरायण ऐसा सदविचार किया .
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
9:09 AM
0
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Saturday, December 20, 2008
अखबारों के पतंग बना
बचपन में हम उन दिनों
बहुत ज्यादा शरमाते थे.
कविता के दो लाइन भी
खुलकर नही बोल पाते थे.
दूरदर्शन के आगे बैठ
जंगल- जिंगल गाते थे.
पापा घर में आ जाये तब
डर से उनके घबराते थे.
स्कूल में हम परीक्षाओं में
अंक बहुत अच्छे पाते थे.
लालटेन की मंद रौशनी में
पढ़ते-पढ़ते सो जाते थे.
मुहल्ले के साथियों को
कहानियाँ खूब सुनाते थे.
एक रूपये का नोट छुपाकर
किताबों में, हम इतराते थे.
जाड़े की धूप में छत पे बैठ
हम आधे बाल्टी नहाते थे.
माँ से थप्पर खा कर ही
फिर दिन में सो पाते थे.
मेहमाँ जो घर में आये कोई
देख मिठाइयाँ ललचाते थे.
शीशी, गत्ते, कबाड़ बेच के
मलाई बर्फ हम खाते थे.
अखबारों के पतंग बना
जैसे तैसे उड़ाते थे.
दादाजी के पाँव दबा
चार आने हथियाते थे.
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
2:44 PM
2
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बचपन के दिन
Thursday, December 11, 2008
मुख्यमंत्री चुनाव December 2008
आये दिन सियासत में अफ़साने बहुत हैं
खेल दावपेंच के आजमाने बहुत हैं.
कुर्सी की दौर में सभी पागल से हुए हैं
इक़ नाजनीन और दीवाने बहुत है .
Online in Hindi Posted by (Sulabh Jaiswal)
Sulabh Jaiswal "सुलभ"
समय
11:14 PM
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